पूर्व IPS संजीव भट्ट को गुजरात कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा!

गुजरात: जामनगर कोर्ट ने पूर्व IPS संजीव भट्ट और उनके सहयोगी को दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई ।

1990 में आयोजित भारत बंद के दौरान जामनगर में हिंसा हुई थी,तब संजीव भट्ट ही जामनगर के ASP थे,इस दौरान पुलिस ने 133 लोगों को हिरासत में लिया था,जिनमें 25 लोग घायल हुए थे और आठ लोगों को अस्पताल भर्ती कराया गया था,इस हिरासत में रहने के दौरान एक आरोपी प्रभुदास माधव जी वैश्वानी की मौत हो गयी थी ।

तब इस मामले में संजीव भट्ट और उनके सहयोगी पर मारपीट का आरोप लगा था और उनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया था, लेकिन तब की गुजरात सरकार ने मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी थी,उसके बाद 2011 में नरेंद्र मोदी सरकार ने संजीव भट्ट के खिलाफ ट्रायल की अनुमति दे दी,बीते बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने संजीव भट्ट की अपील को खारिज कर सुनवाई करने से इंकार कर दिया ।

अपनी गिरफ्तारी के दौरान इस पूर्व IPS ने कहा था कि नरेंद्र मोदी सरकार बदले की भावना से उसके खिलाफ कार्रवाई कर रही है क्योंकि वे सरकार की तानाशाही के खिलाफ  खासकर नरेंद्र मोदी के खिलाफ लगातार लिखते रहे हैं आवाज उठाते रहे हैं ।

इस दौरान भट्ट की तरफ से गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, गुजरात हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ मुकदमे के दौरान कुछ अतिरिक्त गवाहों को गवाही के लिए समन देने के उनके अनुरोध से इंकार कर दिया था, गुजरात सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि निचली अदालत ने 1990 के उनकी हिरासत में मौत के मामले पर पहले ही 20 June के लिए फैसला सुरक्षित कर रखा है ।

जस्टिस बनर्जी और जस्टिस रस्तोगी की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने गुजरात सरकार व अभियोजन पक्ष की दलील को माना कि सभी गवाहों को पेश किया जा चुका है और उसके बाद फैसले को सुरक्षित रखा गया है,अब दोबारा मुकदमें पर सुनवाई करना सजा के मामले में देर करने की रणनीति है ।

संजीव भट्ट को 2011 में बिना मंजूरी के गैर हाजिर रहने व आवंटित सरकारी वाहन के दुरूपयोग को लेकर निलंबित कर दिया गया था

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