सलीका जरूरी है विरोध के लिए भी…..

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मेरी चाय की होटल थी और जो काउन्टर देखता था उसका नाम जयेश था…

मेरा अच्छा दोस्त था और बड़ा भाई मानता था मुझको!

वो मुसलमानों को मानता भी बहुत था,खुद उसके मोहल्ले में एक दरगाह थी जहां वो आते जाते रहता था!
कभी कभार वो हिन्दू मुस्लिम मुद्दे के कुछ ऐसे सवाल पूछ लेता जिससे मैं चौकन्ना रह जाता था…
पर मैं हमेशा उसको सही ढंग से समझा देता था और वो सब भूल कर मस्त काम मे लगा रहता।एक दिन वो बाइक चला रहा था और मैं उसके पिछे बैठा था…इत्तेफ़ाक़ से उसका मोबाइल मेरे हाथ मे था और मैं उसी से टाइमपास कर रहा था!जब मैंने उसका wtsp खोला तो मैं पूरी तरह चौंक गया…उसके wtsp में 10/12 तरह के अलग अलग हिंदुत्ववादी या बीजेपी it सेल टाइप के कुछ ग्रुप थे…आधे घण्टे का टाइम था तो मैंने सब ग्रुप चेक किये!मैं ये देखकर चौंक गया कि हम में से कहीं मुसलमानों के ऐसे स्क्रीन शॉट आये हुए थे जो भक्तों का,मोदी का,देवी देवताओं का मजाक उड़ाते थे और ये उनके दिलों में नफरत भरने के लिए काफी था!

इतनी ज्यादा नफरत लोगो के दिमाग मे इन ग्रुपो से भरी जा रही जिनका अंदाज़ा कोई नही लगा सकता!

जब हम दुकान पर पहुंचे तो मैंने उसको साइड में बैठाया और कहा कि ये सब क्या है?
किसने बताया तुझे ये सब?

वो बोला कि “सेठ!मुझे खुद को नही पता कि मैं कब एड होता,रोज़ रोज़ नए ग्रुपो में एड हो रहा…जिनको मैं जानता तक नही वो लोग मुझे ऐसे ग्रुपो में एड कर रहे!”

मैंने उसको समझाया कि कुछ भी मन मे बात हो तो मुझसे बात कर लिया कर…बस अंदर नफरत मत भरना किसी के लिए!

उसके बाद वो हर कभी मुझसे कुछ न कुछ सवाल पूछता और मैं आराम से जवाब दे देता…एक वक्त पर ऐसा हाल था कि मैं सोया रहता तो जबर्दस्ती मुझे उठाकर नमाज़ पढ़ने भेज देता कि जाकर नमाज़ पढ़ो,तो दुकान में बरकत होगी!एक ही प्लेट में खाना और एक ही ग्लास में पानी पीते थे हम लोग उस टाइम!

फिर मुझे वो दुकान छोड़नी पड़ी,मैं अपने रस्ते पर निकल गया और जयेश अपने रस्ते पर!अब कभी जब मैं उसका wtsp स्टेटस देखता तो उसमें हमेशा मुझे हल्की हल्की मुसलमानों के लिए नफरत नज़र आने लगी!

ऐसे करोड़ो जयेश हैं जो न चाहते हुए भी इस दलदल में फंस रहे और उसकी मुख्य वजह कुछ हमारी हरकतें भी हैं!रोडसाइड दूर की बात सोशियल मीडिया की ही हरकतें देख लें!

कुछ पत्रकार सेलेब्रिटी लोग मोदी विरोध बहुत सहजता से कर लेते,उनसे इंस्पायर होकर कुछ लोग जिनका दिमागी और समझने का स्तर कम होता वो मज़ाक मस्ती तंज करके अपना विरोध करते और खुद को बड़ा लेखक समझने लगते और फिर उनसे इंस्पायर वो लड़के हो जाते जिनको बोलने चालने का ढंग ही नही होता और वो विरोध में इतने पगला जाते कि धर्म मजहब के लिए उल्टा पुलटा लिखना शुरू कर देते…edit pic बनाते,गालियां देते और नफरतों का बढ़ावा देकर it cell वालो को नफरत फैलाने का सामान अवेलेबल कराते!

पत्रकार सेलीब्रिटी लोगो का कुछ नही कर सकते वो अपना विरोध सही स्तर से कर रहे पर उनसे नीचे वाले जो हम हैं,जो रात दिन मस्ती- मज़ाक,मज़े लेते,तंज करते,इस चीज़ को हम मिलकर खत्म कर सकते ताकि हमसे नीचे वाला जो तबका है वो हमसे सही राह सीखे ना कि हमसे नफरत करने वाली राह चुने!

मेरे घर मे बच्चे हैं और आपके घरो में भी प्यारे प्यारे बच्चे होंगे जो हमारे लिए सबसे अजीज हैं…क्या आप सच मे उन्हें इस भयावह और शैतानी माहौल में पलते बढ़ते देखना चाहते?

अपने लिए नही,खुदा के लिए नही,किसी और के लिए नही बस अपने उन बच्चों की खातिर खुद को कुछ वक्त के लिए रोक लीजिए!
हमारा घिरता विरोध कुछ अच्छा नही करने वाला पर हां हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बहुत ही भयावह,घृणित माहौल जरूर तैयार कर रहा!

अब आप सोचिए आपको करना क्या?

 

रिजवान मस्तान

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