क्या अखिलेश यादव की कोई वैचारिक प्रतिबद्धता नहीं ?

बेगूसराय में यदि तेजस्वी यादव चाहते तो वाहवाही लूटने के लिए कन्हैया कुमार को राजद का समर्थन दे देते और राजद प्रत्याशी तनवीर हसन साहब भी शायद इसे हंस कर स्वीकार कर लेते। इसके बाद कप्हैया की जीत सुनिश्चित थी। लेकिन लेकिन जीत ही राजनीति का अंतिम सत्य नहीं है, विचारधारा के भी अपने मायने हैं। तेजस्वी के दिमाग में लालू यादव जी की वैचारिक प्रतिबद्धता हिलोरें मार रही थी। इसलिए उन्होंने कन्हैया की जीत के बजाए हार का रिस्क लेकर तनवीर साहब को उम्मीदवार बनाया। तेजस्वी की नजर में हार जीत का नही वैचारिक प्रतिद्धता मायने रखती है। इसलिए उनका राजनीतिक कद निरंतर बढ़ता जा रहा है।

फोटो:तेज बहादुर यादव की फेसबुक वाल से

दूसरी तरफ अखिलेश यादव जी को देखें। उन्होंने बनारस से अपनी जमीनी कार्यकर्ता उम्मीदवार शालिनी यादव को हटा कर तेजबहादुर यादव को उम्मीदवार बनाने का फैसला कर लिया। जाहिर है कि अखिलेश की कोई वैचारिक प्रतिबद्धता नहीं है। जमीन से जुड़ी शालिनी के बजाये स्काई लैब तेजवहादुर यादव को उम्मीदवार बनाने की मंशा से उनकी राजनीतिक प्रतिबद्धता के चीथडे उड़ जा रहे है, लेकिन उनको इससे क्या? उन्हें नहीं मालूम की मुसलमानों का दर्द क्या है। एक घोषित मुस्लिम विरोधी को भला कोई मुसलमान क्यों कर वोट करेगा?

मुझे याद है कि अयोध्या गोली कांड के बाद नेता जी (मुलायम सिंह जी) ने यूपी के सपा जिला अध्यक्षों/ मंत्रियों, विधायकों और हारे प्रत्याशियों की संयुक्त बैठक बुलाई थी। बैठक में नेता जी ने कहा था, वह जानते हैं कि गोली चलाने के बाद होने जा रहे रहे चुनाव में सपा का जीत पाना मुश्किल है, लेकिन हम मुद्दों से समझौता नहीं करेंगे, आप भी न करें। वैचारिक दृढ़ता आज नहीं तो कल और उसके बाद आने वाले तमाम कल में हमें जीत जरूर दिलायेगी। यही कटु सत्य है। इतिहास गवाह है कि नेता जी ही सही साबित हुए।

अब तेजबहादुरवादियों और अखिलेश जी से मेरा सवाल है? शालिनी यादव जो जनता के बीच रहने वाली हैं, उनका टिकट काट कर तेजबहादुर को टिकट क्यों? अखिलेश जी आपकी राजनीतिक सोच बहुत भ्रमित है। बनारस में मोदी से लड़ कर शालिनी भी हारेगी और तेज बहादुर भी हारेंगे। फिर शालिनी का टिकट बदल क्यों रहे। क्यों उस आदमी को टिकट दे रहे जिसकी भाषा घोर सयाम्प्रदायिक और समाज तोड़क है।

अखिलेश जी आप समझदार हैं। आपकी यहीं बेवकूफी वाली नीति अन्ततः आपको नेता जी यानेी आपके पिता जी से अलग कर देंगी। फिर आप एक मंडल के नेता बनके रह जायेंगे। देश का नेता बनने के लिए आप नेता जी यानी मुलायम सिंह जी से सबक लीजिए, या फिर अपने से छोटे तेजस्वी से समाजवाद का पाठ सीखिए। बाकी आप समझदार हैं।
आप से कभी नहीं मिल पाने वाला और नेता जी का गिरेबान पकड़ कर सच बतमाने वाला एक समाजवादी।

लेखक – नज़ीर मालिक (वरिष्ठ पत्रकार ) 

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