‘सुमय्या ख़ान’ को अब ‘ सुभाष जैन’ के लिए ‘सर’ या ‘अंकल’ जैसे औपचारिक सम्बोधनों की ज़रूरत नहीं थी…अब वो उसके ‘पापा’ थे! प्यारे पापा!

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जन्मदिन मुबारक पापा ! आप मेरे लिए क्या हैं! आपका होना मेरी ज़िन्दगी में क्या मा’नी रखता है! आपसे कितना लगाव है!…इन सब बातों की चर्चा करना अब बस एक औपचारिकता लगती है क्योंकि ये सारे जज़्बात लफ़्ज़ों से परे हैं। कहना तो बस यही है कि “लव यू पापा”…इससे ज़्यादा और कुछ नहीं।
आपके लिए आपके पिछले जन्मदिन पे जो लिखा था उसे शेयर कर रही हूँ और वो इसलिए ताकि लोग जान सकें कि आज के इस वक़्त में जब हवा में ऑक्सीजन से ज़्यादा नफ़रत का ज़हर घुला हुआ है, आँखों पे धर्म का मोटा चश्मा चढ़ा हुआ है…कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनका मज़हब सिर्फ़ मुहब्बत है और दिल इबादतगाह।

18.6.2018:

कहते हैं कि आप जिनसे बहुत ज़्यादा मुहब्बत करते हैं उनके लिए लिखना बहुत मुश्किल होता है क्योंकि आप बावजूद कोशिशों के काग़ज़ पे वो एहसास नहीं उतार पाते जो आप उस शख़्स के लिए महसूस करते हैं, जज़्बात की वो शिद्दत अल्फ़ाज़ हरगिज बयान नहीं कर पाते।

बक़ौल टेनीसन :” For words like Nature
Half reveal and half conceal
The soul within “

फिर भी मैंने एक छोटी सी कोशिश की है कि अपने प्यारे पापा की सालगिरह के मौके पर उनके लिए अपने जज़्बात को अल्फ़ाज़ का जामा पहना सकूँ, उन्हें बता सकूँ कि उनकी मेरी ज़िन्दगी में क्या अहमियत है क्योंकि मैं शायद कभी रूबरू या फोन पे ये सारी बातें न कह पाऊँ और शायद इससे बेहतर तोहफ़ा भी मैं उन्हें न दे पाऊँ…

कई दफ़ा ज़िन्दगी हमें बिन माँगे इतने ख़ूबसूरत तोहफ़े थमाकर चली जाती है कि हमें उसका एहसास भी नहीं हो पाता। आप भी मेरे लिए ज़िन्दगी से मिले उन्ही ख़ूबसूरत तोहफ़ों में से एक हैं पापा! अभी कल ही की तो बात है- आप मेरे लिए बिल्कुल अजनबी थे…फिर मैंने आपको ‘सर’ कहना शुरू किया, फिर ‘अंकल’ और फिर पिछले बरस (2017) का धुंध में लिपटा दिसम्बर हमारे बीच की सारी धुंध साफ़ कर गया। ‘सुमय्या ख़ान’ को अब ‘ सुभाष जैन’ के लिए ‘सर’ या ‘अंकल’ जैसे औपचारिक सम्बोधनों की ज़रूरत नहीं थी…अब वो उसके ‘पापा’ थे! प्यारे पापा!

पिछले बरस कितने अजीब इत्तेफ़ाक़ हुए मेरे साथ! ख़ुदा ने दो बहुत ख़ूबसूरत तोहफ़े मुझे अता किये। दो ऐसी शख्सियतों की ज़िन्दगी का अहमतरीन हिस्सा बनी जिसके बारे में मैंने कभी सोचा भी नहीं था…और वो भी उन्हें बिना देखे, उनसे बिना मिले। लेकिन ये दोनों शख्सियतें अब इस तरह से मेरी ज़िन्दगी का हिस्सा हो गयी हैं मानों हम पिछले कई बरसों से एक-दूसरे को जानते हों। और पापा! आप तो हमेशा कहा करते हैं कि “तुम या तो पिछले जनम में मेरी माँ थीं या मेरी बेटी!”
कभी-कभी मेरे लिए इन सबका यक़ीन करना मुश्किल हो जाता है। कभी सोचने बैठूँ तो लगता है मैं सपने में हूँ और मेरी नींद खुलते ही ये सपना ख़त्म हो जाएगा।

कहते हैं एक बेटी के लिए पिता का होना सर पर छत का होना है…आसमान का होना है! और इस मुआमले में मैं शायद बहुत ज़्यादा ख़ुशकि़स्मत हूँ क्योंकि एक तो संयुक्त परिवार में रहने की वजह से अब्बू और छोटे अब्बू दोनों से बराबर का प्यार मिला…कभी चाचा और पिता के बीच का फ़र्क़ ही समझ नहीं आया…और फिर मुझे आप मिले। ख़ुदा से मिली इन नियामतों के बदले शुक्रिये का लफ़्ज़ बहुत छोटा महसूस होता है। ख़ुदा ने मुझे जो आसमान दिया है वो बहुत वसी’अ ( विस्तृत) है जिसमें कई प्यार करने वाले चेहरे सितारे बनकर टिमटिमा रहे हैं।

पापा! आपके रूप में मुझे सिर्फ़ एक पिता ही नहीं, एक दोस्त और एक माँ भी मिली। आपसे मैं एक दोस्त की तरह सारी बातें शेयर कर सकती हूँ और आप भी एक दोस्त की तरह मेरी बातें समझते हैं, मुझे सलाह देते हैं नसीहत नहीं। आपने कभी मुझपर अपनी सोच थोपने की कोशिश नहीं की। मुझे ख़ुद पर और अपने फ़ैसलों पर भरोसा करना सिखाया।
और कभी आप बिल्कुल एक माँ बन जाते हैं…माँ की तरह ही मेरा मन समझते है…सिर्फ़ मेरी आवाज़ सुनकर आप मेरे मूड का अंदाज़ा लगा लेते हैं। कभी-कभी तो मैं हैरान हो जाती हूँ कि ऐसा कैसे मुमकिन है! वाक़ई दिल के रिश्ते समझना और उनकी कैफ़ियत बयान कर पाना बहुत मुश्किल होता है।

आज के वक़्त में जब धर्म, स्वार्थ और राजनीति ने सारे माहौल को ज़हरीला बना दिया है, जब किसी अंजान शख़्स पर भरोसा करने से लोग डरने लगे है, जब ख़ून के रिश्ते भी औपचारिक होकर रह गये हैं…ऐसे वक़्त में हमारा रिश्ता किसी नवजात बच्चे की तरह मासूम और निःस्वार्थ है। किसी तपते रेगिस्तान में नखलिस्तान ( मरुद्यान) की तरह है। सूरज की तपिश से झुलसती ज़मीन के चेहरे पर पहली बारिश की फुहार की तरह है। अँधेरी रात में किसी जुगनू की तरह है। हमारा रिश्ता भले ही इस पूरे परिदृश्य को न बदल सके लेकिन बदलाव की ओर बढ़ते हज़ारों क़दमों में से एक क़दम ज़रूर है।

आख़िर में जन्मदिन की ढेर सारी मुबारकबाद पापा! ख़ुदा से बस यही दुआ है कि आपका हाथ हमेशा मेरे सर पर बना रहे । आपकी बेटी जताना नहीं जानती लेकिन वो आपसे बहुत प्यार करती है। लव यू पापा ! ❤❤”

आपकी बेटी ;  ‘सुमय्या ख़ान’

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