“हम बनाम वो”: डर, नफरत और हिंसा

बेंजामिन नेतन्याहू

इज़राइल में 9 अप्रैल को वोट डाले जायेंगे। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को इस बार विपक्ष की तरफ से कड़ी टक्कर मिल रही है। उन पर भ्रष्टाचार और कॉरपोरेट मीडिया के सहारे जनता को गुमराह करने के आरोपों की जाँच चल रही है। ऐसे में दुनियाभर के तथाकथित राष्ट्रवादी नेताओं की तरह उन्हें भी फ़र्ज़ी राष्ट्रवाद और धार्मिक उन्माद का ही सहारा है। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच की माँग करने वाला हर इज़राइली अब या तो देशद्रोही है या यहूदियों का दुश्मन या अरबों का दोस्त। इज़राइल में 10% अरब आबादी तो हमेशा ही उनके और उनके कट्टर समर्थकों के निशाने पर रही है। लेकिन अब पूरा विपक्ष ही इज़राइल विरोधी और यहूदी विरोधी हो गया है।

डॉनल्ड जॉन ट्रम्‍प

इस मामले में इज़राइल अकेला नहीं है। आप दुनिया भर के तमाम कट्टर राष्ट्रवादी नेताओं को देख लें। उनके लिए राष्ट्रवाद और धर्म सत्ता पर कब्ज़ा करने के अचूक हथियार से ज़्यादा कुछ नहीं। उनकी आर्थिक नीति, सुरक्षा नीति, विदेश नीति और पूरी राजनीति अपनी सत्ता के इर्दगिर्द ही घूमती है। उदाहरण के लिए अमेरिका को ही ले लीजिये। 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रम्प एक कट्टर राष्ट्रवादी नेता के रूप में उभरे जो अमेरिका को “दुबारा से महान” बनाना चाहता है। एक तरफ वो अमरीकी जनता को यह विश्वास दिलाने में भी कामयाब रहे कि अमरीका अब महान नहीं रहा और अमरीका को दुबारा वो ही महान बना सकते हैं। दूसरी तरफ खुद को जिताने के लिए अमरीका के सबसे बड़े दुश्मन रूस से मदद भी लेते रहे। ट्रम्प के नेतृत्व में अमरीका कितना महान बन गया है यह हकीकत किसी से छुपी नहीं है।

कुछ ऐसी ही कहानी तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तय्यप एरदोगान की भी है जो कुछ दिन पहले तक अमरीका के सबसे बड़े दोस्तों में शुमार किये जाते थे और अब अपने विरोधियों को अमरीका का एजेंट और इस्लाम का दुश्मन करार देते हैं। जबकि तुर्की में उनके खिलाफ जो माहौल बन रहा है जिसके के लिए उनकी अपनी नीतियाँ ज़िम्मेदार रहीं हैं।

रेसेप तय्यप एरदोगान

दरअसल”धर्म और राष्ट्रवाद ऐसे मुद्दे हैं” जिनके सहारे जनता को आसानी से इतना जज़्बाती किया जा सकता है कि वो असली मुद्दे भूल जाये। ऐसे में यह जनता अपने ही स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे उठाने वालों को भी कभी कभी देश और धर्म का दुश्मन समझ लेती है।और दुनियाभर के शातिर नेता जनता की इसी कमज़ोरी का फायदा उठाते हैं। इसिलये आप किसी भी देश का इतिहास उठाकर देख लो, देश के विकास में सबसे ज्यादा योगदान करने वाले नेताओं ने कभी भी राष्ट्रवाद और धर्म का राजनीति में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल नहीं किया होगा।और वे जिन्होंने अपनी पूरी राजनीति राष्ट्रवाद और धर्म के मुद्दों पर चलाई होगी उनका देश के विकास में कोई बड़ा सकारात्मक योगदान नहीं होगा।

लेख़क– अनवर बरेलवी

अनवर बरेलवी

जयपुर केन्द्रीय कारागाह में उच्च सुरक्षा कक्ष में लगातार हो रही मानवाधिकार उल्लंघन व हिंसा, स्वतंत्र जांच हो

 

जयपुर केन्द्रीय कारागाह में उच्च सुरक्षा कक्ष में लगातार हो रही मानवाधिकार उल्लंघन व हिंसा,स्वतंत्र जांच हो

आज दिनांक 31 मार्च 2019 को विभिन्न मानवाधिकार संगठनों के प्रतिनिधि, अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ताओं की बैठक में जयपुर केन्द्रीय कारगाह में कैदियों के साथ हुई मारपीट की कडी निन्दा की गई। सभी का मानना था कि जयपुर के उच्च सुरक्षा जेल में बहुत गडबडीया देखनी को आ रही है और किन्हीं कैदियों को निशाना बना कर हिरासत में हिंसा की जा रही है। 20 फरवरी 2019 को पाकिस्तानी आजीवन कारावास कैदी शाकीर उल्लाह उर्फ मोहम्मद हनिफ की कुछ सहकैदियों द्वारा हत्या कर दी गई। 40 दिन के भीतर ही 30 मार्च 2019 को 10 साल से शांतिपूर्वक रूप से रह रहे कुछ कैदियों की जमकर पीटाई हुई कि अनेक घायल भी हुये और उन्हें जेल अस्पताल में भर्ती भी करवाया गया।

जिन कैदियों के साथ मारपीट हुई, उन्होंने 28 और 29 मार्च को भूख हडताल पर अपनी दो जायज मांग, की उच्च सुरक्षा जेल कक्ष में शिकायत पेटी लगाई जाये व जेल मैन्यूवल में दिया गया विजिटरस कमेटी व एक जज को भेजा जाये। 29 मार्च 2019 को उन्होंने यह आवेदन जयपुर बम धमाके को लेकर बनी विशेष अदालत में अपना आवेदन इन मांगों सहित दिया था। जिसमें उनके साथ जेल कर्मचारी द्वारा मारपीट करने की धमकियों के बारे में भी लिखा था। अतिरिक्त जिला जज ने जेल को इस सम्बन्ध में नोटिस भेज जवाब मांगा।

कल दिनांक 30 मार्च 2019 को उन्होंने जज साहब को पूनः आवेदन दिया दोहराते हुये कि वे कार्यवाही चीफ कारापाल कमलेश शर्मा एवं गार्ड रमेश चन्द मीणा जिन्होंने जान से मारने की धमकी दी है जिनके खिलाफ उचित कार्यवाही की जाये। विशेष अदालत के जज साहब ने पुनः जेल अधिकारी को नोटिस भेज जवाब मांगा हैं।

जब यह कैदी वापस जेल पहुंचे तो सुबह से उच्च सुरक्षा जेल कक्ष में कैदियों और कर्मचारियों के बीच चल रही तनातनी और हिंसा का अब निशाना अब यह 4 कैदी बने है। जिससे कुछ कैदी घायल हो गये।

हमारी मांग हैं कि :

· तुरन्त एक विजिटर कमेटी स्वतंत्र लोगो की गठित की जाये जिससे 30 मार्च को हुये हादसे व उसकी पृष्ठ भूमि की जांच हो जाये।

· चीफ कारापाल कमलेश शर्मा एवं गार्ड रमेश चन्द मीणा को निलम्बित कर सख्त कार्यवाही की जाये। जो मारपीट हुई उसके विरूद्ध में कैदियों को एफ.आई.आर. दर्ज करने का मौका दिया जाये।

· जो घायल कैदी हैं उन्हें सवाई मानसिंह अस्पताल में दिखाया जाये।

· मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट को तुरन्त दौरा करना चाहिए।

· राजस्थान न्यायालय जयपुर बैंच के न्यायाधिश के द्वारा जेल का दौरा किया जाये।

· इन सभी कैदियों के रिश्तेदारों से मिलने की इजाजत दी जाये ना कि उन्हें इंकार किया जाये जो कि 30 मार्च 2019 से किया जा रहा है।

बैठक में कैदियों के वकिल फारूख पैकर (ए.पी.सी.आर.), पी.यू.सी.एल. की कविता श्रीवास्तव, जमायते इस्लामी हिन्द के डॉ. मोहम्मद इकबाल सीद्दीकी सहित 15 लोगों ने भाग लिया।

फारूख पैकर, कविता श्रीवास्तव, मोहम्मद इकबाल सीद्दिकी

इस बच्ची ने सिर्फ अपना ही स्कूल बंक नहीं किया लाखों और भी बच्चों से करवाया

इस बच्ची ने स्कूल बंक किया,लाखों बच्चों का बंक करवाया भी मगर आपके लिए, आने वाली नस्लों के लिए पूरा पढ़िए क्योंकि ज़रूरी है । पहले हम वह मैसेज लिख रहें जो हमारे देश के प्रधानमंत्री को मुख़ातिब है –
Dear mr.modi you need to take action
Now against the climate crisis,not just talking about it because if you keep on going like this,doing business as usual,and just talking about and bragging about the little victories you are going to fail.and if you fail ,you are going to be seen As one of the worst villains in human history in the future.and you don’t want that .

‘प्रिय श्रीमान मोदी, जलवायु परिवर्तन की समस्या को लेकर अब सिर्फ बात करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि अब आपको इस बारे में कोई ठोस कदम उठाना ही होगा। क्योंकि अगर आप पहले की तरह चलते रहे, पहले की तरह व्यापार करते रहे, और छोटी-छोटी सफलताओं के बारे में बात करते रहे, तो आप नाकाम होने जा रहे हैं और अगर आप फेल हुए तो मानव इतिहास के भविष्य में आपको एक बहुत बड़े खलनायक के रूप में याद रखा जाएगा। और आप ऐसा नहीं करना चाहेंगे।’

यह मैसेज दिया है दुनिया की सबसे छोटी इन्वरमेंटल एक्टिविस्ट ग्रेटा थंबर्ग का,जो अभी हाल ही में नोबल के लिए नॉमिनी हुई हैं । 16 साल की स्वीडिश ग्रेटा ने लाखों लोगों खासकर बच्चों को पर्यावरण के लिए खड़ा कर दिया है । अद्भुत संगठन क्षमता के साथ ग्रेटा ने लाखों बच्चों को पर्यावरण की चिंता के लिए स्कूल बंक करवाया ।वह जब बोली कि हमे अपने लीडर को परेशान औरदर्द में देखना है प्रयावरण की चिंता में,नाकि सुक़ून में । क्लाइमेट चेंज को लेकर ग्रेटा इतनी कम उम्र में चिंतित हैं जिस उम्र में हम आप मौसम की रुमानियत में खोए रहते हैं ।
हो सके तो इसे जानिए और अपनी धरती को बचा लीजिये ।याद कीजिये कुछ दिन पहले हमने कहा था कि अगर हम अपना असली दुश्मन नही जानते,तो अक्सर अपने सहयोगियों को ही खत्म कर डालते हैं । हमारा असली दुश्मन ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज है ।इसे पहचानिए,इसकी जगह हम आपस मे धर्म जाति के नामपर मारकाट मचाकर अपने सहयोगियों को ही खत्म कर रहें हैं ।
यह भी देखिए कि वह कैसा शानदार देश है जिसके बच्चे मानवता की चिंता में बाहर निकल रहें हैं और वहीं हम अपने बच्चों को क्या सिखा रहें हैं । हमारी धरती पर लाखों ग्रेटा होंगी जिनको मानवता की चिंता है, जिनको पर्यावरण की चिंता है । उन्हें मौका दीजिये,धर्म जाति की संकुचित सोच से ऊपर उठकर पूरी सभ्यता की चिंता करने को तैयार कीजिये ।

ग्रेटा थंबर्ग को मुबारकबाद इतनी कम उम्र में हमें एहसास दिलाने के लिए की हमारी प्राथमिकताएँ क्या होनी चाहिए । प्रधानमंत्री समेत देशभर से अनुरोध की उसके मैसेज को ईगो पर नही बल्कि प्राथमिकता पर लें,क्योंकि सवाल पूरी मानवता का है…और इस नई एक्टिविस्ट के तरीकों को भी देखिए जिससे लाखों बच्चे जुड़ गए । आंदोलन के इन नए तरीकों को ग़ौर से देखिए, जब सब रोते हैं कि हमारे आंदोलन में लोग नही जुड़ते ।वैसे भी इस वक़्त दुनिया को बड़े ही ग़ौर से देखना चाहिए,क्योंकि यह संयोग कभी कभी आता है जब दुनिया वर्ल्ड लीडर से ख़ाली होती है । तब देखिये दुनिया कैसे अपने बीच नए बीज पैदा करती है, उसे सींचती है और दरख़्त बनाती है, यानि लीडर ।पूरी दुनिया मे लीडर बनते देखिये और खुद को उस रास्ते पर ले जाइए,संसार को जोड़ने और फिक्र करने वालों की ज़रूरत होती है । तोड़ने और बांटने वाले तो हर दौर में होते हैं । अपने यहां तमाम नदियों समेत गंगा को ही गौर से देख लें,उसके लिए जान देने वालों को देख लें और साथ ही तय करलें अपनी प्राथमिकताएँ और फिक्र…
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लेखक हफीज़ किदवई