गाजियाबाद : विजयनगर में पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़

कल दिनांक 26 July को पच्चीस हजार का ईनामी पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया दो अन्य निकल भागने में कामयाब ।

गाजियाबाद क्राइम ब्रांच थाना विजयनगर इंस्पेक्टर और उनकी टीम के संयुक्त प्रयास से पच्चीस हजार का ईनामी बदमाश आकिल पुत्र प्राकश निवासी ग्राम छोलस जारचा गौतमबुद्ध नगर को आज पुलिस से हुई मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया ।

गाजियाबाद क्राइम ब्रांच द्वारा इंस्पेक्टर विजय नगर को सूचना दी कि 6 July 2019 गाजियाबाद थाना क्षेत्र से माल समेत चोरी की गयी गाड़ी Max Bulero,नंबर U.P14 H.T 8018 को कुछ बदमाशों द्वारा TNT चौराहा सिद्दार्थ विहार में बेचने की कोशिश की जा रही है,सूचना के बाद इंस्पेक्टर विजयनगर और गाजियाबाद क्राइम ब्रांच टीम ने मौके पर पोंहच बदमाशों की घेराबंदी कर दी पुलिस को देख बदमाशों ने भागने की कोशिश की और जब पुलिस ने उनका पीछा किया तो बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी जबाबी कारवाई में पुलिस द्वारा की गयी फायरिंग में एक बदमाश गोली लगने से घायल हो गया बाकी दो भागने में कामयाब रहे,पुलिस ने घायल को गिरफ्तार कर चोरी की गयी गाड़ी बरामद कर ली ।

गिरफ्तार किए गये बदमाश से जब पूछताछ की गयी जिसमे उसने अपना नाम आकिल पुत्र प्राकश बताया,पुलिस ने बताया आकिल अन्य मामलों में भी वांछित था और उसके ऊपर पच्चीस हजार का ईनाम भी है।

पाँच साल पहले सोशल मीडिया पर लिखा था पोस्ट, पुलिस ने लगाया देशद्रोह

प्रधानमंत्री के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट लिखने के एक पाँच साल पुराने मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पोस्टकर्ता इंचौली निवासी “फहम अजीम सिद्दिकी” के खिलाफ आई टी एक्ट और देशद्रोह का मुकदमा कायम कर कोर्ट में हाजिर किया जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया ।

फहम ने अप्रेल 2014 में प्रधानमंत्री के खिलाफ आठ दस पोस्ट लगाए थे,जिसपर भाजपा के नेता की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने फेसबुक मुख्यालय कैलीफोर्निया से सूचना मांगी थी,जिसके आधार पर फहम के खिलाफ आई टी एक्ट और धारा 124A(देशद्रोह)लगाई गयी है।

23 साल कैद के बाद बेगुनाह साबित हुऐ अली भट्ट का भावनाओं के बाजार में स्वागत ।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वाईरल हो जहा हैं जिसमें एक व्यक्ति कब्र पर औंधे मुँह लेटा हुआ है,दो व्यक्ति जो हाथों में कैमरा लिए हुए हैं वे इसे प्रोफ़ेशनल अंदाज़ में शूट कर रहे है, वीडियो आगे बढ़ने पर नजर आता है एक व्यक्ति उस औंधे मुँह लेटे व्यक्ति को उठाने के लिए आगे आता है,तभी वहीं मौजूदा अन्य व्यक्ति जो कैमरे की जद मे आने से बचते हुए उसे उठाने की कोशिश करने वाले व्यक्ति को ऐसा करने से मना करता नजर आता है ।

ये कब्र पर लेटा व्यक्ति मुहम्मद अली भट्ट है,22 मई सन 1996 को एक बस जो बीकानेर से आगरा जा रही थी,समलेकी नामक स्थान पर उस बस मे विस्फोट होता है और 14 लोग मारे जाते है और 37 घायल हो जाते हैं,उस घटना के कई आरोपियों में मुहम्मद अली भट्ट भी एक आरोपी था,जिन्दगी के अहम 23 साल जेल में गुज़ारने के बाद मुहम्मद अली भट्ट अदालत से निर्दोष साबित हुआ है,हमेशा की तरह सवाल फिर वही है कि उसके इन 23 सालों का हिसाब कौन देगा जो उसने बिना किसी गुनाह के जेल में गुज़ारे हैं,कांग्रेस की हुकूमत के वक़्त के दो ख़ौफ़नाक काग़ज़ी संगठन सिमी और इंडियन मुजाहिदीन “मुसलमानों औक़ात मे रहो” मुहीम को सलीक़े से अंजाम देते रहे,आजकल ये दोनो संगठन विलुप्त है,क्योंकि वर्तमान सरकार को ढक छुपकर कुछ भी करने की ज़रूरत नही है, आजकल तो फ़ैसला ऑन द स्पॉट किया जा रहा है,दोषी होने के लिये कोई आपत्तिजनक साहित्य बम बंदूक नहीं डेढ़ दो किलो गोश्त ही काफ़ी होता है ।

बात शुरू हुई थी कब्र पर औंधे मुँह लेटे मुहम्मद अली भट्ट से,मुहम्मद अली भट्ट जिस कब्र पर लेटा है वो उसके वालिद की क़ब्र है । 22 साल का वक़्त बहुत होता है,इस दौरान उसे पैरोल पर भी बाहर नही आने दिया गया क्योंकी वो एक ख़ूँख़ार आतंकवादी होने का आरोपी था । जेल से रिहा होने के बाद जब वो बाप को पुरसा देने क़ब्रिस्तान पहुँचा तो भावनाओं का ज्वार बर्दाश्त नही कर पाया और बाप की क़ब्र से लिपट गया,फिर वही हुआ जो ऊपर लिखा है ।

भावनाओं के व्यापार में मुनाफा बहुत और मेहनत कम है, इन्हीं भावनाओं के कई बड़े खिलाड़ी इस वक़्त तख़्तनशी है । वैसे इस खेल के छोटे मोटे खिलाड़ी हर जगह है । एक व्यक्ति जो 22 साल बाद अपनी बेगुनाही साबित कर जेल बाहर आता है । 22 साल पहले उसका बाप ज़िंदा था आज वो मिट्टी के नीचे दबा हुआ है । उसकी कैफ़ियत दूर बैठे हम आप महसूस कर सकते हैं। लेकिन दोनो प्रोफ़ेशनल कैमरा पर्सन को देखिए,उनके लिये मुहम्मद अली भट्ट भावनाओ के बाज़ार का वो कच्चा माल है जिसे नमक मिर्च लगाकर बाज़ार में बेचा जायेगा। ऐसा ही कुछ दिन पहले बाज़ार मे अभिनंदन था। ख़ैर वो बड़ा खेल था। इस छोटे खेल में भी कमज़ोर दिल वालों का तो कलेजा फट ही जायेगा,आवेश में मुट्ठियाँ तनेंगी,हुंकार उठेगी,और फिर सब शांत हो जायेगा हमेशा की तरह। लेकिन इसी सबके बीच किसी का मिशन पूरा होगा,कोई यूट्यूब चैनल हिट होगा,और फिर कहीं अगले शिकार की तलाश होगी। गिद्ध जो अब लुप्तप्राय है, इस पक्षी की ख़ासियत थी कि मरते जानवर के पास बैठ कर उसकी जान निकलने का इंतज़ार करता था। जान निकले की वो टूट पड़े। वो कालजयी फ़ोटो याद कीजिये जिसमें भूख से मरते बच्चे के पास गिद्ध बैठा है. उस फ़ोटोग्राफ़र मे इंसानियत ज़िंदा थी,वो इस मंज़र का सदमा बर्दाश्त नही कर पाया और उसने ख़ुदकुशी कर ली थी। लेकिन आज ऐसा कहाँ होता है। इंसान के सदमे और इमोशन का बाज़ार बनाया जा चुका है। बैकग्राउंड में मातमी धुन डाल कर देखने वाले की आँख से आँसू निकाल अपनी जेबें जो भरनी होती हैं ।

दुनिया भर में इमोशन बहुत बड़ा बाज़ार है इसमें अनंत संभावनाएं हैं। पूँजीवाद अपने बाज़ार के लिये युद्ध करवाता है। जिसमे देश शहर तबाहो बर्बाद होते हैं। फिर बाज़ार वहाँ पहुँचता है। एनजीओ को पैसा देता है। एनजीओ आँसू पोंछते हैं। मातमी बैकग्राउंड म्यूज़िक के साथ डाक्यूमेंट्री बनती है। उस डाक्यूमेंट्री को बड़े बड़े ईनाम मिलते हैं,और फिर ये बाज़ार फलता फूलता रहता है।

हम सब इसी बाज़ार के ग्राहक हैं और मुहम्मद अली भट्ट जैसे लोग सामान हैं। जिसे कैसे हमारे सामने पेश करना है कि हम सीना पीटते हुए ख़रीदने दौड़े ये बाज़ार के व्यापारी तय करते है। कभी एक सन लाइट साबुन से नहाना धोना (कपड़ा) सब होता था. आज शरीर के हर हिस्से के लिए अलग साबुन,शैम्पू है। वैसे ही इमोशनल वाला धंधा है। कभी अभिनंदन है तो कभी मुहम्मद अली भट्ट है।

लेखक – इकबाल अहमद

दो नाबालिगों ने की पांच साल की मासूम से दरिंदगी

दिल्ली की सीमा से सटे कपसेहेड़ा से एक डरा देने वाली खबर समान आई है जिसे सुनकर आप चौंकने पर मजबूर हो जायेंगे ।

दिल्ली से सटे कपसेहेड़ा में एक पाँच साल की एक मासूम बच्ची के साथ 10 और 11साल के दो नाबालिगों ने टॉफी का लालच देकर रेप जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया ।

इस घटना पर मिली जानकारी के अनुसार मामला कुछ यूँ है सोमवार शाम झुग्गी में रहने वाली मासूम पड़ोस के बच्चों के साथ खेल रही थी बताया जाता है उसी वक्त दोनो आरोपी बच्ची को टॉफी का लालच देकर करीब के पार्क में ले गये जहां उन्होंने उसके साथ रेप की वारदात को अंजाम दिया ।

जब बच्ची की माँ कुछ देर बाद उसे खोजते हुए पार्क पोंहचीं तो उसने देखा दोनों आरोपी बच्ची के साथ रेप कर रहे उसके आवाज देने पर वह दोनो बच्ची को छोड़कर भाग गये ।

पुलिस को सूचना देने के बाद बच्ची को मेडिकल के लिए ले जाया गया जहाँ उसके साथ हुऐ रेप की पुष्टि हुई, पुलिस द्वारा आस पास के इलाके में छापेमारी कर दोनो नाबालिग आरोपियों को पकड़ कर जुवेनाइल एक्ट के तहत करेक्शन रूम भेज दिया गया ,बच्ची का फिलहाल हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है ।

इस तरह से हल हो सकती है रेप की समस्या !

जिस तरह हर रोज रेप की खबरों से अखबर सोशल मीडिया और न्यूज चैनल अटे पड़े हैं,उससे एक बात साफ है इस मुल्क में महिलाओं के प्रति अत्याचार ने एक महामारी का रूप ले रखा है,हर दिन किसी नई जगह से इंसान के खौफनाक रूप को दिखाने वाली खबरें आती हैं ।

अभी कल ही की तो बात है एक नौ महीने की बच्ची से रेप की कोशिश में नाकाम रहने पर उसकी हत्या की खबर सुर्खियों में थी,उससे ठीक एक दिन पहले चार साल की बच्ची से रेप की खबर सुर्खियों में थी और दस दिन पहले अलीगढ़ के टप्पल में एक ढ़ाई साल की बच्ची से रेप कर उसकी हत्या की खबर पर देश का गुस्सा और टेलीविजन का न्यूज ऐंकर उबल मार रहा था ।

आखिर क्यों इस बात को नहीं मान लिया जाता कि महिलाओं को लड़कियों को और बच्चियों को समझाने से पहले इस वक्त सबसे ज्यादा जरूरत है पुरूषों को लड़कों को और बुढ्ढों को समझाने की उन्हें ये शिक्षा देने की कि महिलायें भी इंसान हैं जीती जागती चलती फिरती उन्हें भी आजादी से जीने का उतना ही अधिकार है जितना तुम्हें है ।

किसी ना किसी जघन्य वारदात के बाद अक्सर सब कुछ हाईलाइट हो जाते है, सख्त कानून, कड़ी कार्रवाई की बातें होने लगती हैं, कड़ी निन्दा,कठोर शब्दों में भर्त्सना चारों तरफ से आने लगती है कभी वालीवुड कभी टॉलीवुड कभी नेताओं की तरफ से आर्दशवाद की चाशनी में शब्द लपेटकर परोसे जाने लगते हैं,पर क्या इससे कुछ बदलता है क्या सच में इससे कोई फर्क पड़ता है?

दरअसल नहीं बिलकुल भी नहीं कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि आदत हो चली है हमारे समाज को दो-तीन दिन हल्ला मचाकर खामोश हो जाने की,मुजरिम के गिरफ्तार हो जाने के बावजूद भी सालों केस चलता है,केस में सजा सुना भी दी जाये तो पहले हाईकोर्ट फिर सुप्रीम कोर्ट में फिर से सालों लग जाते हैं फाईनल सजा डिक्लेयर होने में, निर्भया रेप कांड के वक्त तो एक नया कानून तक बना पर क्या उसके बाद बलात्कारों का सिलसिला थमा है?

हर बार सिस्टम और सरकार को कोसने भर से काम चल सकता है? जल्द ही सब खामोश होकर अगले किसी हादसे का इंतजार करने लगते हैं ताकि फिर से यही सब दोहराया जा सके ।

आज जरूरत है सरकार और समाज के साझा प्रयासों से ग्रामीण स्तर से लेकर मैट्रो सिटी तक में स्कूलों में एक नये सब्जेक्ट के तौर पर ह्यूमन नेचर को पढ़ाये जाने की कि कैसे और क्यों इंसान जानवरों से बेहतर और कब वो हैवानों को पीछे छोड़ देता ये हमें अपने बच्चों को समझाना पड़ेगा,खासकर मर्दानगी को लेकर जिन धारणाओं को गढ़ दिया गया है उन्हें तोड़ने की,उसके लिए जरूरी है हमारी सरकार और सेंसर बोर्ड भी ज्यादा सेंसिटिव हो फिल्में और टीवी ही नहीं बेब सीरिज तक को सेंसर किया जाये और महिलाओं के प्रति कामुकता को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाया जाये ।

अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर हम कच्चे जहनो पर पड़ने वाले गलत प्रभावों को नजर अंदाज नहीं कर सकते, मौजूदा वक्त में कानून और न्याय व्यवस्था में इस तरह के मामलों को निपटाने के लिए अलग से व्यवस्था करने की जरूरत है, जिसमें सेवा निवृत्त न्यायधीशों को साथ लेकर नया विभाग बनाया जा सकता है,टेलीविजन और इंटरनेट का व्यापक इस्तेमाल होना चाहिए जागरूकता फैलाने के लिए और सिनेमा हॉल में 52 सेकैंड के राष्ट्रगान के बाद एक दो मिनट का इसी विषय से जुड़ा विज्ञापन दिखाना अनिवार्य कर देना चाहिए ।

पूर्व IPS संजीव भट्ट को गुजरात कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा!

गुजरात: जामनगर कोर्ट ने पूर्व IPS संजीव भट्ट और उनके सहयोगी को दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई ।

1990 में आयोजित भारत बंद के दौरान जामनगर में हिंसा हुई थी,तब संजीव भट्ट ही जामनगर के ASP थे,इस दौरान पुलिस ने 133 लोगों को हिरासत में लिया था,जिनमें 25 लोग घायल हुए थे और आठ लोगों को अस्पताल भर्ती कराया गया था,इस हिरासत में रहने के दौरान एक आरोपी प्रभुदास माधव जी वैश्वानी की मौत हो गयी थी ।

तब इस मामले में संजीव भट्ट और उनके सहयोगी पर मारपीट का आरोप लगा था और उनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया था, लेकिन तब की गुजरात सरकार ने मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी थी,उसके बाद 2011 में नरेंद्र मोदी सरकार ने संजीव भट्ट के खिलाफ ट्रायल की अनुमति दे दी,बीते बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने संजीव भट्ट की अपील को खारिज कर सुनवाई करने से इंकार कर दिया ।

अपनी गिरफ्तारी के दौरान इस पूर्व IPS ने कहा था कि नरेंद्र मोदी सरकार बदले की भावना से उसके खिलाफ कार्रवाई कर रही है क्योंकि वे सरकार की तानाशाही के खिलाफ  खासकर नरेंद्र मोदी के खिलाफ लगातार लिखते रहे हैं आवाज उठाते रहे हैं ।

इस दौरान भट्ट की तरफ से गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, गुजरात हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ मुकदमे के दौरान कुछ अतिरिक्त गवाहों को गवाही के लिए समन देने के उनके अनुरोध से इंकार कर दिया था, गुजरात सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि निचली अदालत ने 1990 के उनकी हिरासत में मौत के मामले पर पहले ही 20 June के लिए फैसला सुरक्षित कर रखा है ।

जस्टिस बनर्जी और जस्टिस रस्तोगी की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने गुजरात सरकार व अभियोजन पक्ष की दलील को माना कि सभी गवाहों को पेश किया जा चुका है और उसके बाद फैसले को सुरक्षित रखा गया है,अब दोबारा मुकदमें पर सुनवाई करना सजा के मामले में देर करने की रणनीति है ।

संजीव भट्ट को 2011 में बिना मंजूरी के गैर हाजिर रहने व आवंटित सरकारी वाहन के दुरूपयोग को लेकर निलंबित कर दिया गया था

सेना को किया शर्मसार…..नाबालिग से बलात्कार………

भारतीय सेना के ईस्टन कमांड हेडक्वार्टर कोलकाता में नाबालिग से रेप का मामला सामने आया है,NDTVइंडिया में छपे आर्टिकल के मुताबिक नाबालिग बच्ची के साथ ये हैवानियत फोर्ट विलियम में हुई,जहाँ पिछले सप्ताह शनिवार शाम के वक्त जब बच्ची के माँ बाप घर पर नहीं थे,तब आर्मी के ही ग्रुप D के एक कर्मचारी द्वारा एक अन्य सेनाकर्मी की नाबालिग बच्ची से रेप की वारदात को अंजाम दिया गया ।

इस मामले में पुलिस द्वारा आरोपी के खिलाफ प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (पॉस्को) तहत केस दर्ज किया गया, आरोपी को स्थानीय अदालत में पेश किया गया जहां से उसे 24 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है ‌।

ध्यान रहे : इससे पहले 23 नवंबर 2017 को इंडिया टीवी द्वारा प्रकाशित के मुताबिक आर्मी के कर्नल द्वारा लेफ़्टिनेंट कर्नल की बेटी से बलात्कार की खबर प्रकाशित की गयी थी ।

कल भी आर्मी के रिटायर्ड जवान द्वारा अपनी ही 19 साल की बेटी से बलात्कार की कोशिश में नाकाम रहने पर गोली मारने का मामला सुर्खियों में रहा है,ये मामला ग्वालियर का है जहां लड़की के सिर पर गोली मारी गई है जिसका अभी इलाज जारी है ।

अब दिल्ली में चार साल की बच्ची से हैवानियत,आक्रोशित भीड़ द्वारा हॉस्पिटल में तोड़फोड़ !

नई दिल्ली: बवाना में स्थित महर्षि वाल्मीकि हॉस्पिटल में तकरीबन 250 व्यक्तियों द्वारा तोड़ फोड़ किये जाने का एक ताजा मामला सामने आया है

क्या है पूरा मामला : दिल्ली के बवाना एक 4 साल की बच्ची से हैवानियत की गयी,जिसकी मेडिकल जाँच के लिए उसे महर्षि वाल्मीकि हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों द्वारा जाँच के लिए दूसरे हॉस्पिटल ले जाने को कहे जाने पर बच्ची के साथ हॉस्पिटल पोंहचे तकरीबन 250 लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने हॉस्पिटल में हंगामें के साथ तोड़फोड़ शुरू कर दी ।

हालांकि हॉस्पिटल स्टाफ को कोई चोट नहीं आई है पर इस घटना का जो CCTV फुटेज सामने आया है उसमें भीड़ काफी उद्वेलित और आक्रोशित नजर आ रही है ।

मौके पर पुलिस के पोंहच जाने से मामला काबू में आ गया, पुलिस ने बताया कि उन्होंने आरोपी व्यक्ति जो तकरीबन 45 साल का बताया जा रहा है उसे गिरफ्तार कर लिया है,पर दिल्ली में बलात्कार और छेड़छाड़ की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं जिन्हें रोकने में दिल्ली पुलिस नाकाम नजर आ रही है।

दिल्ली की ही एक अन्य घटनाओं में ताजा घटना कल हुड्डा सिटी सेंटर मैट्रो स्टेशन की है, जहां एक व्यक्ति द्वारा महिला को गलत तरीके से छूने और महिला के सामने ही मास्टरबेट करने का मामला भी प्रकाश में आया,जब महिला द्वारा सोशल मीडिया पर ट्विट कर उसके साथ घटित इस घिनौने घटनाक्रम की जानकारी दी गई ।

सैनेटरी पैड में छिपाकर रखी तीन करोड़ की ड्रग्स के साथ महिला गिरफ्तार!

फिल्मी अंदाज में ड्रग्स तस्करी का एक मामला सामने आया है, जहां एक महिला को तकरीबन तीन करोड़ की ड्रग्स के साथ बेंगलुरु हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के कैम्पगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से एक महिला को ड्रग्स तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया,महिला ने तकरीबन तीन करोड़ की ड्रग्स को अपने सैनेटरी पेड्स के अंदर छिपा कर रखा था,आरोप है यह महिला ड्रग्स को कतर की राजधानी दोहा लेकर जा रही थी लेकिन हवाई अड्डे पर चेकिंग के दौरान उसे धर लिया गया, बेंगलुरु पुलिस ने उसके साथ तीन अन्य को भी गिरफ्तार किया है जिनसे पूछताछ की जा रही है ।

मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ी इस घटना हुई गिरफ़्तारियों में दो की पहचान अबू और मोहम्मद के रूप में हुई है, दोनों केरल के कोच्चि शहर के रहने वाले बताये जा रहे हैं, टाईम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक,ये लोग इंडिया कतर ड्रग्स तस्करी का रैकेट चला रहे थे और बेंगलूर इनका मेन अड्डा बताया जा रहा है ।

अस्टिन टाऊन पर स्थित इनके ठिकाने पर पर छापामारी कर पुलिस ने भारी मात्रा में ड्रग्स बरामद किए हैं,जिसकी अनुमानित कीमत तकरीबन तीस करोड़ बताई जा रही है ।

गिरफ्तार महिला को मोटे पैसे का लालच दिया गया था,इस मामले में गिरफ्तार सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, पुलिस मामले की गहनता से छानबीन कर रही है ।

बताया जाता है बेंगलुरु में ड्रग्स तस्करी का धंधा बड़े पैमाने पर फैला हुआ है, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने हाल ही में बेंगलुरु में ही दो अन्य जगहों पर छापेमारी कर तकरीबन पाँच सौ किलो पार्टी ड्रग केटामाइन बरामद किया था, जहां दो लेबोरेटरी भी स्थापित मिलीं थीं जिनमें ड्रग्स की जांच और बनाने का कार्य होता था,बताया जाता है इसकी तस्करी तबले, हारमोनियम,गिटार जैसे म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट्स के अंदर छिपा कर की जाती है,पर इस तरह से सैनेटरी पैड के अंदर छिपा कर की जा रही तस्करी का ये पहला मामला सामने आया है,इस मामले में दक्षिण भारत के सबसे बड़े ड्रग माफिया शिवराज ऊर्ज को गिरफ्तार किया गया,जिसका कारोबार ऑस्ट्रेलिया तक फैला बताया जाता है ।