मूर्तियाँ लगवाना है पुरानी परम्परा : मायावती

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अवाम की आवाज़ ब्यूरो: सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे में बसपा अध्यक्ष मायावती ने कहा – हमारे देश में मूर्तियाँ लगाना पुरानी परम्परा रही है ।

उन्होंने अपने वकील शैल द्विवेदी के जरिए सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि “भारत में स्मारिकायें बनवाना और मूर्तियाँ लगवाना कोई नई बात नहीं है”। काँग्रेस राज में केंद्र और राज्य सरकारों ने देशभर में सरकारी खजाने से जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी,राजीव गांधी,पीवी सिंह नरसिंह राव आदि की मूर्तियाँ लगवाईं, लेकिन इन मूर्तियों को लेकर किसी ने भी आपत्ती नही दर्ज करवाई ।

स्टेचू ऑफ़ यूनिटी

मायावती ने हाल ही में सरकारी खर्च 3,000 करोड़ से बनवाई गयी सरदार पटेल की मूर्ति और मुंबई में शिवाजी महाराज की मूर्तियों का हवाला देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भगवान राम की भव्य प्रतिमा बनवाने की योजना का भी जिक्र किया जिसमें शुरूआती प्रॉजेक्ट रिपोर्ट,भूमि अधिग्रहण, डिजाइनिंग डिवेलपमेंट इत्यादि पर ही 200 का अनुमानित खर्च आने की संभावना है ।

पूर्व मुख्यमंत्री ने लखनऊ में अटल बिहारी वाजपेई, आंध्रप्रदेश में वाई एस राजशेखर रेड्डी, कर्नाटक मांड्या में प्रस्तावित माँ कावेरी की 350 फीट ऊँची मूर्ति, अमरावती में 155 करोड़ के अनुमानित खर्च से एन टी रामाराव की मूर्ति,तथा चैन्नई के मरीन बीच पर 50 करोड़ की लागत से बनने वाली जे जयललिता की मूर्ति की भी बात की । साथ ही उन्होंने कहा कि आम जनता की सेवा के लिए वे अविवाहित रहीं और दलितों के उत्थान में अपना जीवन समर्पित कर दिया । बदले में जनता का जो प्यार मिला और जो उनकी इच्छा थी,उसी से प्रेरित होकर राज्य विधानसभा को स्मारिकाओं एवम मूर्तियों के लिए बजटीय आवंटन करना पड़ा ।

मायावती ने अपना हलफनामा दाखिल करते हुए सुप्रीम कोर्ट में दिए अपने जबाबों में कहा,”यह जनता की इच्छा थी”।

मायावती ने मूर्तियों पर खर्च की गयी सरकारी रकम को जाईज ठहराते हुए अपने हलफनामे में कहा कि विधानसभा में चर्चा करने के बाद मूर्तियाँ लगायीं गयीं और इसके लिए नियम अनुसार सदन से बजट भी पास कराया गया था । मायावती ने आगे अपने हलफनामे में कहा कि उनकी मूर्तियाँ लगवाना जनभावना तो थी ही साथ ही ये बसपा के संस्थापक कांशीराम की भी इच्छा थी,अपने जबाब में उन्होंने ये भी कहा कि दलित आंदोलन में उनके योगदान के लिए मूर्तियाँ लगवायीं गयीं हैं,जिसके चलते पैसा लौटाने का सवाल ही नहीं ।

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