सुप्रीम कोर्ट ने मंजूर की शादी के लिए धर्मपरिवर्तन के समर्थन की याचिका

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राजिस्थान हाई कोर्ट

बीते शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट राजिस्थान उच्च न्यायालय के दिये फैसले के खिलाफ दायर उस याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है जिसमें आस्था से बाहर या सिर्फ शादी करने के इरादे से धर्म परिवर्तन करने को लेकर सख्त दिशा निर्देश दिए गये हैं ।

जस्टिस अरूण मिश्रा और जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन को राजिस्थान सरकार के वकील की याचिका की कॉपी सौंपने को कहा है,पीठ ने कहा है वो इस याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई करेगी ।

सुनवाई के दौरान पेश वकील ने कहा कि राजिस्थान उच्च न्यायालय ने एक लड़की के अपनी मर्ज़ी से दूसरे धर्म के व्यक्ति से शादी करने की इच्छा के चलते, दायर की गई हैबियस कॉरपस याचिका की सुनवाई के दौरान धर्मांतरण के खिलाफ सामान्य दिशा निर्देश पारित कर दिये,याचिकाकर्ता ने ये दलील दी कि उच्च न्यायालय का ये फैसला संविधान के तहत दिये गये उन मौलिक अधिकारों का सीधे तौर पर उल्लंघन करता है, जिसमें 9 जजों की संविधान पीठ के द्वारा के.एस पुट्टस्वामी मामले में जीने के अधिकार में निजता का अधिकार भी शामिल है ।

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि इस फैसले में गलती से प्राधिकारी को किसी व्यक्ति के इरादे का (मेंटल कंडीशन) का पता लगाने के लिए अघोषित रूप से अधिकार दे दिये हैं,ये फैसला पूरी तरह मनमाना है क्योंकि फैसले ने धर्म परिवर्तन के अपने इरादे को अधिकारियों को सूचित करने को कहा है जो कि संविधान का पूरी तरह उल्लंघन है साथ ही साक्ष्यों प्रक्रिया के कानूनों के विपरीत है ।

दरअसल इस पूरे मसले को लेकर राजिस्थान उच्च न्यायालय ने 15 December 2017 को पारित अपने फैंसले में कहा है कि धर्म परिवर्तन का इच्छुक कोई भी व्यक्ति पहले इस संबंध में जिला कलेक्टर को सूचित करेगा,और कलेक्टर इस बारे में एक सप्ताह के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी करेंगे,एक सप्ताह के बाद विवाह के उद्देश्य के लिए वो व्यक्ति अपना धर्म परिवर्तन कर सकता है, उच्च न्यायालय ने विवाह के लिए बलपूर्वक धर्म परिवर्तन की जाँच के लिए ये दिशा निर्देश जारी किए गये थे ।

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