राजनीति,युवा और देशभक्ति !

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ये भारतीय राजनीति का अनदेखा दौर है जब विश्व के सबसे महान लोकतंत्र में होने वाले चुनाव को जिसे कि राष्ट्रीय उत्सव भी माना जाता है उसे अब पूरी तरह एक जंग में तब्दील कर दिया गया है,हर दिन ही कोई ना कोई कहीं से उठ खड़ा होता है और हमें ये बताकर डराने की कोशिश करने लगता है कि अगर हमने उनका साथ नहीं दिया और उनको नहीं चुना तो इस देश को बर्बाद होने से कोई भी नहीं बचा सकेगा.

पार्टियों की नीतियाँ भले ही अलग अलग हों पर डर का व्यापार तो लगभग हर पार्टी कर रही है, कुछ सत्ता पाने के लिए तो कुछ अपनी सत्ता को बचाये रखने के लिए इसी माहौल को बनाकर रखना चाहते हैं जहाँ हर व्यक्ति खुदको पहले से ज्यादा असुरक्षित मेहसूस करे और वो अपनी सोचने समझने ‌की ताक़त खोकर सिर्फ उन्ही के हाँथों की कठपुतली बनकर रह जाएँ । इस होड़ में भी अभी तक सत्ताधारी दल के नेता ही सबसे आगे नजर आ रहे हैं । जैसे अभी कल ही माननीय नरेंद्र मोदी जो कि सौभाग्य से इस देश के “प्रधानमंत्री भी हैं (हैरान मत हों) उन्हें अक्सर ही ये बात याद दिलवाने की जरूरत पड़ती रहती है कि वे सिर्फ बीजेपी के नेता या प्रचारक नहीं इस देश के प्रधानमंत्री भी हैं ।

कल एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ये
कहते हुए नज़र आते हैं कि मैं पहली बार वोट डालने जा रहे नौजवानों से ये कहना चाहता हूँ की आप पहली बार वोट डालने जा रहे हैं पहली बार दिया गया वोट हमेशा याद रहता है  “आपका ये पहला वोट ” पुलवामा के शहीदों के नाम हो सकता है क्या?”।

आखिर क्यों नरेन्द्र मोदी को ये बात कहने की जरूरत आ पड़ी ? थोड़ी फुरसत निकाल कर इसपर गौर कीजिये और मुमकिन हो सके तो अभी कीजिए,क्योंकि वो कहावत तो सुनी ही होगी आपने कि “अब पछताये होता का जब चिड़िया चुग गई खेत”। अखिर पिछले पांच सालों के शासन काल में प्रधानमंत्री की एकमात्र उपलब्धि पुलवामा के शहीद तो नहीं ना? तो फिर क्यों उन्हें ये शब्द इस्तेमाल किये ? क्योंकि देशभक्ति और उससे जुड़े तमाम विषय जैसे देश,सेना,बहादुरी,महानता ही वो ब्राह्मस्त्र हैं जिसमे देशप्रेम+डर+भावुकता=वोट तक पोंहचने की अचूक क्षमता है।

भारत ही  एकमात्र वो देश नहीं है जहाँ डर+देशभक्ति को एक प्रोडक्ट बनाकर जनता का वोट हासिल करने की कोशिश की जा रही है या जनमत हासिल किया गया है अगर आप इतिहास खंगालने जायेंगे तो सिंकदर से लेकर हिटलर और ट्रंप से लेकर मोदी तक सबने इसका भरपूर इस्तमाल किया है और कर रहे हैं ।

आज ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कहते हैं “हिंदुओ के पास बीजेपी के अलावा कोई विकल्प नहीं” । क्या और क्यों विकल्प नहीं है क्या किसी मीडिया न्यूज चैनल या किसी जनप्रतिनिधि को नहीं चाहिए कि वे आदित्यनाथ से सवाल करें की उनकी बात का अर्थ क्या है,और आखिर क्यों वे आज ये बात कहकर हिंदू जो इस देश का बहुसंख्यक भी है जो आज भी राष्ट्रपति से लेकर चीफ जस्टिस की कुर्सी तक पर भी विराजमान है,उस बहुसंख्यक को दीन-हीन और शोषित बताने की कोशिश कर रहे हैं?

मौजूदा समय में मुझे फिल्म 3 इडियट्स का वो सीन याद आ रहा है जिसमें प्रोफेसर स्टूडेंट को बताता है,कि ज़िन्दगी एक जंग है जहाँ कमजोर के लिए कोई जगह नहीं इसलिए इसे एक जंग की तरह ही लो और कमजोरों को कुचलते हुए आगे बढ़ते रहो वरना हार जाओगे ।

बड़े अफसोस की बात है ये कि जो देश आज भी गरीबी,भुखमरी,बेरोजगारी,अशिक्षा,खुशहाली में पिछड़ा हुआ है,उस देश के नेता आज भी जनता को राष्ट्रवाद की अफीम चखा कर फिर छलने की कोशिश कर रहे हैं। डॉक्टर अब्दुल कलाम ने अपने एक भाषण में कहा था भारत युवाओं का देश है युवा उम्मीदों का देश है और मुझे पूर्ण विश्वास है इस देश का नौजवान आने वाले वक्त में भारत को एक महान महाशक्ति बनाने में अहम भूमिका निभायेगा ।

लेखक – सैय्यद असलम अहमद

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