पूर्व सांसद जो बीड़ी बनाकर गुजारा करते हैं !

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आज के दौर में हम जब भी संवैधानिक पद पर “सुशोभित रहे” किसी व्यक्ति की बात करते हैं तब अक्सर हमारे जहनों में ऊँचे बंगले चमचमाती गाडियाँ और उसके आस पास मंडराते सुरक्षाकर्मी घूम जाते हैं,पर अपवादों की भी कमी नहीं रही है हमारे देश में, मौजूदा दौर में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को भी जनता का एक बड़ा हिस्सा इस वजह से भी पसंद करता है कि उनके वक्तव्यों में अक्सर फकीरी त्याग और ईमानदारी की झलकियां नजर आती हैं ।

पर आज हम आपको जिस व्यक्ति के बारे में बात कर रहे हैं वे शायद उस वक्त सूचना प्रौद्योगिकी के उचित विकास ना हो पाने की वजह से गुमनाम से होकर रह गये,हम बात कर रहे हैं 1967 में जनसंघ के उम्मीदवार के तौर पर लोकसभा चुनाव जीत “सागर” मध्य प्रदेश से सांसद रहे “रामसिंह अहिरवार” की इन्हे इलाकाई लोग साईकिल वाले नेता जी के नाम से जानते हैं,सागर के पुरव्याऊ टोली मोहल्ले की एक संकरी गली में स्थित एक साधारण से मकान में रहने वाले भूतपूर्व सांसद जी के पास दर्शनशास्र में स्नातक और अंग्रेजी साहित्य में परास्नातक की डिग्री भी है ।
84 साल के रामसिंह अहिरवार आज भी हर रोज कई किलोमीटर साईकिल चलाते हैं इस उम्र में भी उनकी सक्रियता प्रेरणादायक है परंतु अब वे राजनीति में सक्रिय नहीं हैं,पूछने पर इस बाबत वे बताते हैं कि “उनके पास कोई भी मोटर वाहन नहीं है उन्हें इसकी कभी आवश्यकता ही नहीं मेहसूस हुई इसलिए उन्होंने कभी इसे हासिल करने का भी प्रयास नहीं किया, पिछले दिनों उन्हे लकवा भी मार गया था जिसके चलते उन्हें बोलने में भी थोड़ी दिक्कत होती है फिर भी उन्होंने साईकिल चलाना नहीं छोड़ी वे फुरसत के वक्त बीड़ी भी बना लेते हैं जिससे उन्हें कुछ कमाई भी हो जाती है ।
हमारे देश में यूँ तो बहोत आर्दशवादी बातें होती हैं पर जब कोई सही में आर्दशवाद स्थापित करते हुए ईमानदारी से जीवन व्यतीत करता है तब हमारी व्यवस्था उसे हर कदम पर चुनौतियों से जूझने पर मजबूर कर देती है, कुछ ऐसा ही रामसिंह को भी झेलना पड़ा,वे बताते हैं अपनी सांसद की पेंशन पाने के लिए भी उन्हें काफी संर्घष करना पड़ा वे बताते हैं उनकी पेंशन काफी संर्घष के बाद किसी तरह 2005 में शुरू हो पाई,आज केंद्र में भी भाजपा की सरकार है और प्रदेश में देढ़ दसक तक भाजपा की सरकार रही,मगर इसके बावजूद भी पार्टी ने उन्हें कभी महात्व नहीं दिया उनसे कभी राय मशविरा भी नहीं किया गया,इस राजनैतिक गिरावट को लेकर रामसिंह काफी चिंतित दिखाई देते हैं इस उपेक्षा को लेकर सालभर पहले उनके धर्मांतरण की खबर भी मीडिया में आई थी । नीचे लिंक मौजूद है

अनुसूचित जाति से आने वाले रामसिंह अपने सांसद बनने की कहानी बयान करते हुए बताते हैं “तब मैं विश्वविद्यालय में पढ़ाई करता था और घर पर बीड़ी बनाकर अपना जीवकोपार्जन करता था,उसी दौरान जनसंघ ने मुझे सागर से सांसदीय सीट से उम्मीदवार बना दिया और मैं चुनाव जीत भी गया” रामसिंह की पत्नी राजरानी मौजूदा दौर के राजनेताओं की संपन्नता पर किये सवाल पर कहती हैं “सुविधाएं हों तो अच्छी बात है मगर मुझे और मेरे पति को सांसद की पेंशन पाने के लिए भी कई सालों तक संर्घष करना पड़ा अब इस पेंशन के सहारे ही जीवन चलता है” ।
रामसिंह के पड़ोसी गोविंद कहते हैं “रामसिंह अन्य नेताओं की तुलना में अलग हैं,वह ऐसे नेता नहीं हैं जो एक बार सांसद बने और खूब सुविधाएं हासिल कर लीं वह सज्जन सीधे और सरल स्वभाव के हैं कभी लगता ही नहीं कि वे ‌सांसद भी रहे हैं साईकिल पर चलते हैं और बीड़ी बनाकर गुजारा करते हैं”।
रामसिंह के कनिष्ठ छात्र रहे और सागर के मौजूदा सांसद लक्ष्मीनारायण यादव कहते हैं”जब रामसिंह को जनसंघ ने उम्मीदवार बनाया सब हैरान रह गये थे,वह चुनाव भी जीत गये मगर उन्होंने पूरा जीवन सादगी से बिताया, कुछ साल पहले एक बार जब सुना कि वह बीड़ी बनाकर गुजारा कर रहे हैं तो आश्चर्य हुआ” स्थानीय राजनीतिक विश्लेषक विनोद आर्य बताते हैं”रामसिंह को देखकर उनके घर के हालात देखकर यह भरोसा नहीं होता वह कभी सांसद रहे हैं,किसी छुटभैये नेता का जीवन स्तर भी उनसे कई गुना बेहतर है, रामसिंह जी लोकतंत्र के सच्चे झंडाबरदार हैं ।

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