देश का भविष्य खतरे में है !

 

अगर आपको कभी जानना हो देश का भविष्य कितना सुरक्षित है तो किसी स्कूल वैन ऑटो या रिक्शा में ठसाठस भरे मासूम बच्चों को देख कर अंदाजा लगा लीजिए,मैट्रो सिटीज हों या कोई छोटा शहर या फिर कस्बा इस स्तिथी में ज्यादातर जगहों पर कहीं कोई बहोत ज्यादा फर्क नजर नहीं आता,फर्क है तो बस इतना कि मैट्रोसिटी में वक्त की बड़ी कमी वजह है तो कस्बों में ये मध्यमवर्ग का एक स्टेट्स सिंबल भी है !

क्योंकि कस्बाई स्तर पर बच्चा कॉन्वेट में पढ़े अब सिर्फ इतना काफी नहीं होता और बहोत सी बातें इसमें जुड़ गयीं हैं कब क्यूँ और कैसे जुड़ीं वो अलग विषय है,एक तरफ जहाँ समय समय पर मासूम बच्चों के यौनशोषण लेकर कई तरह के आरोप इन वैन रिक्शा के ड्राईवरों और क्लीनरों के खिलाफ लगते रहते हैं,वहीं भयंकर रूप से ठसाठस भरे हुये और खस्ताहाल वाहन इस कारोबर में सिर्फ थोड़े से ज्यादा मुनाफे के लालच में लगे हुये नजर आते हैं,कई बार तो वाहन चालक अनाड़ी और लापरवाह भी होते हैं,क्योंकि छोटे शहरों और कस्बाई स्तर पर अक्सर देखने में आता है इन वाहनों के ड्राईवर कम तनख्वाह में सिर्फ हाँथ साफ करने के लिए (ड्राईविंगपूरी तरह सीखने के लिए ) यहाँ नौकरी करते हैं !

बरहाल इन खस्ताहाल वाहनों में ठूसा हुआ देश का भविष्य रोज ही अपनी किस्मत पर रोता हँसता आपको नजर आ ही जाता होगा,वक्त की कमी का रोना हो या फिर स्टेट्स सिंबल का दिखावा अभिभावकों को क्या ये सब नजर नहीं आता? स्कूल हर साल स्कूल वैन का भाड़ा बढाये या एक अनाड़ी कम तनख्वाह का ड्राईवर रखे,इनको किसी चीज से मतलब नहीं बस सरर्दद ना बढ़े जिम्मेदारी ना उठानी पड़े, हो सकता है ये बात माँ बाप की महिमा गाने वाले देश में कुछ अलग दिखे पर सोचना हम आपको ही है बच्चे हमारे आपके ही होते हैं,जो हमारे देश का आने वाला कल भी हैं !

अब आप सोच रहे होंगे इस सबमें स्कूल प्रशासन कहाँ है ये जिम्मेदारी तो उनकी है,पर आप एक बात हमेशा भूल जाते हैं जब आपको अपने बच्चों की परवाह नहीं है,तो फिर लाखों करोड़ों रूपये घूस देकर मान्यता लेने वाले स्कूल किस तरह और क्यों ये सोचेंगे? उनको आपकी स्कूल फीस वैन फीस एनुआल फंक्सन फीस वगैराह वगैराह टाईम से चाहिए जो आप देते ही हैं,जिससे उनकी और आपकी जिम्मेदारी खत्म भला आप कब उनसे गाड़ियों के बारे में पूछते हैं,कि गाड़ी का फिटनेस टेस्ट कब हुआ था या फिर ड्राईवर कितना अनुभवी है सोचिए आपने कभी ये जानने की कोशिश की है क्या !

बात यहीं नहीं खत्म होती है गाड़ी ज्यादा से ज्यादा मुनाफा दे इसके लिए CNG छोड़ अक्सर LPG का इस्तेमाल धड़ल्ले से होता है जो बहोत गंभीर खतरे की बात है अक्सर कस्बों और छोटे शहरों में बिना किसी सर्टीफिकेशन वाली गैस किट इस्तेमाल आज भी इन गाड़ियों में होता है जो कई बार हादसे की वजह बनता है !

बच्चों को स्कूल में ऐडमिट करवा देना उनकी कोचिंग फीस उनकी जरूरतें और ख्वाहिशें पूरी करने भर से हम सबकी जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती हमें इस तरह की तमाम छोटी बड़ी ज़िम्मेदारियों का ख्याल रखना भी बहोत जरूरी है क्योंकि ये बात उनकी सुरक्षा से जुड़ी है उनके भविष्य से जुड़ी है जो इस देश का भविष्य हैं ।

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