इमरान पर बेवजह ऐतराज क्यूँ ?

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फोटो इमरान के फेसबुक पेज से

इमरान प्रतापगढ़ी को मुरादाबाद से इसीलिए चुनाव नही लड़ना चाहिए क्योंकि वो बाहर से हैं  ठीक है माना, तो महोदय यह बताइये अखिलेश यादव आजमगढ़ से चुनाव क्यों लड़ रहे हैं? नरेन्द्र मोदी क्यों बनारस से चुनाव लड़ कर जीते ? या राहुल गांधी अमेठी से क्यों चुनाव लड़ते हैं? और अब तो वायनाड(केरल) से भी? अच्छा अच्छा अखिलेश यादव ,राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय नेता हैं इसलिए यह लोग कही से भी चुनाव लड़ सकते हैं? लेकिन “इमरान” राष्ट्रीय नेता नही हो सकता इसलिए उन्हें चुनाव नही लड़ना चाहिए? इमरान प्रतापगढ़ी तो “गवय्या” है ढाई लाख रुपये लेते है एक मुशायरे के इसलिए उसे “नेता” होने का कोई हक नही है,है न? तो कुमार विश्वास कौन है? क्या आपने कभी कुमार विश्वास के लिए इसी भाषा का इस्तेमाल किया है? कभी भी? क्यों उन्हें तो राज्यसभा भेजने की कोशिश में थे या नही?

 

आखिर क्यों आपको दिन रात मुस्लिम समुदाय के लिए बात करने वाला सवाल करने वाला असदुद्दीन ओवैसी “विलेन” नज़र आते है क्यों? क्या वजह है? क्या नुकसान कर दिया आपका? अच्छा चलिये छोड़िये,ठीक है,मैं गलत हूँ ,मान ली आपकी बात ,आप “दिलवाले” लोगो की आप ही की बात तो मानी जाती है हर बार जब आप कहते हो,आज़म खान,असदुद्दीन ओवैसी,अहमद पटेल,ग़ुलाम नबी आजाद,,या और भी बहुत से यह सब “बुरे” नेता है,और पता है आप क्यों कहते है क्योंकि आपके अंदर “एहसासे कमतरी” है,बहुत ज़्यादा इतनी ज़्यादा की पूरी की पूरी यूनिवर्सिटी तैयार करके देने वाले आज़म खान आपको बुरे नज़र आने लगते है कब जब वो मीडिया द्वारा “तोड़ मरोड़” भाषण देकर हाइलाइट हो जाते हैं तो यह आपकी ज़िम्मेदारी हो जाती है तो आप अपनी “छवि” सुधारने के लिए आप इन्हें बुरा भला कहते हैं ,और इतना कि आप खुद को संतुष्ट कर लेते हैं,और यह बात सिर्फ इमरान प्रतापगढ़ी की नही है बात असदुद्दीन ओवैसी की नही है बात आज़म खान की नही है ,बात यह है कि जो माहौल बनाया गया है या जो बताया गया है उसमे आप कन्हैया कुमार को सपोर्ट कर सकते हो कोई मसला नही है लेकिन उसी सीट पर पहले से लड़ते आ रहे “तनवीर हसन” को सपोर्ट नही कर सकते है वरना आप “प्रगतिशील” नही हो और आपको प्रकाश राज का समर्थन इसीलिए करना चाहिए कि क्योंकि वो लिंचिंग से मुद्दे पर बोलते आये है लेकिन आप उस मुद्दे को संसद में उठाने वाले ओवैसी को बुरा ही समझेंगे? क्यों? क्यों? क्यों? वो इसलिए क्योंकि अगर आप उर्दू नाम वाले का समर्थन भी करते है तो आप बुरे बन जाते हो ,इसलिए ज़रूरी है कि आप इन लोगों की ज़्यादा से ज़्यादा बुराई करो,इन्हें कोसों इन्हें “ट्रोल” करो, इनके खिलाफ सोशल मीडिया पर मुहिम चलाओ है न?

देखिये चुनाव अपनी जगह,राजनीति अपनी जगह,लेकिन यह देश संविधान से चलता है ओर संविधान सबको बराबर हक़ देता है,कही आप भूल तो नही गए है इस हक़ को? और चुनाव लड़ना भी उसी में से एक है,तो इमरान प्रतापगढ़ी उसी तरह कही से भी चुनाव लड़ सकते है जिस तरह कोई और नेता लड़ता है आपको आलोचना करनी है करिये हक़ है आपके,कन्हैया कुमार को जीतना चाहिए,अच्छी बात है लेकिन इसका मतलब यह नही की तनवीर हसन को “विलेन” आप बना दें,और बार बार इस बात को ध्यान रखिये यह मुल्क “आपका” है,आपने अपने खून से सींचा है इस मुल्क को जान दी है,माल दिया है उम्र दी है,यह मुल्क 125 करोड़ भारतीयों का है,इस बात को हल्का मत समझिये,यह मुल्क संविधान से चलता है और चलेगा भी… एहसास कमतरी अच्छी चीज नही है इसे खत्म करिये अच्छा लगेगा….

#देशचुनावराजनीति
#Politics

लेख़क-असद शेख

असद शेख़

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