आज के युवाओं का राजनैतिक विमर्श

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आज की युवा पीढ़ी की राजनीतिक विमर्श राजीव गाँधी के पुत्र राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी की पुत्री प्रियंका गाँधी, मुलायम सिंह के पुत्र अखिलेश यादव, लालू यादव के पुत्र तेजस्वी यादव तक सीमित रह गया है। उपरोक्त नेताओं का राजनीतिक संघर्ष उस परिवार में जन्म लेना है जो राजनीतिक रूप से स्थापित परिवार था। इसलिए आज के युवाओं को राजनीतिक संघर्ष का अर्थ ही समझ में नहीं आता है। यही कारण है कि आज आंदोलनों का दौर ख़त्म होकर स्थापित नेताओं के परिवार की चापलूसी करना रह गया है। बेशक़ जॉर्ज फ़र्नान्डिस अटल बिहारी वाजपेयी को प्रधानमंत्री बनाने में अहम भूमिका निभा रहे थे। मग़र एक गैर राजनीतिक परिवार का लड़का होने के नाते जॉर्ज फ़र्नान्डिस का राजनीतिक जीवन का संघर्ष मुझें तेजस्वी, राहुल एवं अखिलेश से ज़्यादा प्रभावित करता है। एक गिरजाघर में पादरी का काम सीखने गये जॉर्ज फ़र्नान्डिस ने जिस प्रकार से संघर्ष करके स्वयं को भारतीय राजनीति में स्थापित किया ऐसे उदाहरण बहुत ही कम मिलते है। सड़क से लेकर संसद तक का पूरा जीवन ही संघर्षों से भरा रहा है। आज डिजिटल मीडिया के इस दौर में कन्हैया जितने मशहूर नहीं हुए उससे कही अधिक जॉर्ज साहब साठ के दशक में मशहूर हुए थे। उनकी लोकप्रियता ही थी कि मंगलोर में जन्म लेने वाले जॉर्ज ने मुम्बई की सड़कों एवं रेल पटरियों को क्राँति स्थल में परिवर्तित कर दिया था। उनकी प्रसिद्धि ही थी कि एक अल्पसंख्यक समुदाय में जन्म लेने के बावजूद भी मुम्बई से होते हुए जातिवाद का गढ़ समझें जाने वाले बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर और नालन्दा का संसद में लगातार प्रतिनिधित्व किया। यह बात सही है कि उन्होंने लालू यादव से स्वयं को दूर कर लिया था और भाजपा के साथ चले गये थे। इसको समझने के लिए जॉर्ज फ़र्नान्डिस बनना पड़ेगा। आज जिस प्रकार से लालू के दोनों पुत्र तेजस्वी एवं तेजप्रताप यादव समय-समय पर राजद के पुराने नेताओं को बेइज्जत करते रहते है वैसे ही उस जमाने मे लालू यादव भी करते थे। प्रधानमंत्री रहते हुए जिस प्रकार देवगौड़ा के साथ लालू जी ने व्यवहार किया था वह किसी से छुपा नहीं था। समाजवादी राजनीति के पाठशाला समझें जाने वाले जॉर्ज फ़र्नान्डिस के साथ जब दुर्व्यवहार होने लगा तब स्वाभिमानी जॉर्ज को जनता दल से अलग होकर समता पार्टी का गठन करना पड़ा। क्योंकि जब लालू यादव बिछावन पर पोटली भिगोगे रहे थे उस समय जॉर्ज फ़र्नान्डिस मुम्बई से सांसद चुन लिए गये थे। यदि जॉर्ज साहब भाजपा के साथ सरकार में नहीं होते तब बहुत पहले लालू यादव उन्हें उसी गुमनाम ज़िंदगी जीने के लिए मज़बूर कर देते ज़िस ज़िंदगी को जीने के लिए नीतीश कुमार ने शरद यादव को मज़बूर कर दिया है।
लेखक
तारिक अनवर चंपारणी

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