अजीम प्रेमजी: एक अजीम इंसान जिसका दिल प्रेम और इंसानियत से भरा है !

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हर साल जब फोर्ब्स दुनियाभर के अरबपतियों की सूची जारी करता है तो भारतीय मीडिया में भारत में अरबपतियों की बढ़ती तायदाद और उनकी जायदाद खूब सुर्खियाँ बटोरती है। हमने बचपन में जिस अरबपति का नाम सबसे पहले सुना था वो शख्स थे विप्रो लिमिटेड के चेयरमैन जनाब अजीम हाशिम प्रेमजी। उसके बाद टाटा और बिरला अरबपतियों की पहचान बने और आज यही जगह अम्बानी को मिल चुकी है। अजीम प्रेमजी भले ही दौलत के मामले में देश के सबसे बड़े अमीर न हों, लेकिन समाजसेवा के लिये दरियादिली के मामले में उनके जैसा कोई और नज़र नहीं आता।
उनका जन्म 24 जुलाई, 1945 को तत्कालीन बॉम्बे प्रेसीडेन्सी में हुआ था। उनके पिता जनाब मुहम्मद हाशिम प्रेमजी उस समय के जाने-माने कारोबारी थे जिन्हें पाकिस्तान बनने पर मुहम्मद अली जिन्ना ने खासतौर पर पाकिस्तान में बसने की दावत दी थी जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था। उनकी कम्पनी Western Indian Vegetables Products Ltd. शुरुआत में तेल और साबुन का उत्पादन किया करती थी। 1966 में अपने पिता के इंतक़ाल के बाद अजीम प्रेमजी (जो उस वक़्त अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे) हिन्दुस्तान वापस आ गये और कम्पनी की ज़िम्मेदारी सम्भाल ली।
अजीम प्रेमजी के कुशल नेतृत्व में कम्पनी ने काफी तरक्की की और कई सारे नये उत्पाद बनाने शुरू किये। लेकिन असली परिवर्तन अभी बाकी था। दरअसल अजीम प्रेमजी देश के शायद पहले कारोबारी थे जिन्होंने कम्प्यूटर क्रान्ति की संभावनाओं को सबसे पहले पहचाना। उनकी पारखी नज़र और दूरदर्शी सोच के नतीजे में आज की विप्रो कम्पनी वजूद में आयी जिसने सॉफ्टवेयर उद्योग में देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर में अपनी एक अलग जगह बनायी। आज भारतीय सॉफ्टवेयर उद्योग की विश्व में जो पहचान है, उसको बनाने में जनाब अज़ीम प्रेमजी और उनकी कम्पनी विप्रो लिमिटेड की बड़ी अहम भूमिका रही है।
अज़ीम प्रेमजी का यह विश्वास है कि देश में सामाजिक और आर्थिक सुधारों के लिए सशक्त शैक्षिक ढाँचा अत्यंत आवश्यक है। इसीलिए उन्होंने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन नाम से एक संस्था बनाई है जो विशेष रूप से शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराती है। इस उद्देश्य के लिए उन्होंने साल 2013 में अपनी कम से कम आधी जायदाद को दान करने का एलान किया था। अभी दो दिन पहले ही उनके 55200 करोड़ रुपये के एक और महादान की खबर मीडिया में आई है।
उनकी इन सेवाओं के लिए कॉरपोरेट जगत और समाजसेवा से जुड़ी विभिन्न सरकारी और ग़ैरसरकारी संस्थाओं से अनगिनत पुरस्कार और सम्मान उन्हें मिल चुके हैं जिनमें सबसे अहम सन 2005 में भारत सरकार ्दवारा दिया जाने वाला देश का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्म भूषण और 2011 में मिला देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्म विभूषण शामिल हैं। अप्रैल 2017 में इंडिया टुडे पत्रिका द्वारा प्रकाशित 50 सबसे शक्तिशाली भारतीयों की सूची में उनको 9वां स्थान मिला था।
अमीरों का दिन ब दिन और अमीर होते जाना और गरीबों के जीवनस्तर में कोई खास सुधार न हो पाना हालाँकि एक विश्वस्तरीय समस्या है लेकिन भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश में यह समस्या बेहद भयावह हो चली है। आज हालत यह है कि इस समस्या से प्रभावी तरीके से निबटने के लिए सरकार के पास न तो पर्याप्त साधन हैं और न ही राजनीतिक इच्छाशक्ति। ऐसे में गैरसरकारी संस्थाओं और व्यक्तियों की भूमिका काफी अहम हो जाती है। अजीम प्रेमजी जैसे उद्योगपति न सिर्फ देश के आर्थिक विकास के लिए, बल्कि सामाजिक और शैक्षिक विकास के लिए भी बेहद ज़रूरी हैं।

अनवर बरेलवी

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